सिंगूर में पीएम मोदी ने टाटा और उद्योग पर चुप्पी साधी, बंगाल BJP में हलचल

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सिंगूर में पीएम मोदी की रैली का बड़ा अपडेट – टाटा और उद्योग पर चुप्पी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सिंगूर हमेशा से एक संवेदनशील और प्रतीकात्मक मुद्दा रहा है। यहां से टाटा मोटर्स की नैनो कार परियोजना का जाना न सिर्फ राज्य की औद्योगिक छवि को झटका था, बल्कि यह आगे चलकर राज्य की राजनीति और चुनावी रणनीतियों में भी एक अहम कारक बन गया। ऐसे में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिंगूर पहुंचे, तो राजनीतिक विश्लेषकों और बंगाल भाजपा नेताओं को उम्मीद थी कि वह अवश्य इस मुद्दे को उठाएंगे। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में न टाटा का नाम लिया और न ही उद्योग से जुड़े किसी विवाद पर बात की।

उद्योग की राजनीति पर मोदी की चुप्पी ने उठाए सवाल

सिंगूर से टाटा नैनो परियोजना का निकल जाना कई वर्षों तक पश्चिम बंगाल की राजनीति का बड़ा विषय रहा है। भाजपा लंबे समय से इस मुद्दे को तृणमूल कांग्रेस के ‘विकास विरोधी’ रुख के उदाहरण के रूप में उठाती रही है। ऐसे में पीएम मोदी द्वारा इस मुद्दे को पूरी तरह अनदेखा करना कई भाजपा नेताओं को चौंकाने वाला लगा।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, बंगाल भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री तृणमूल सरकार पर उद्योग को लेकर हमलावर रुख अपनाएंगे। उनका मानना था कि सिंगूर की भूमि अधिग्रहण और टाटा परियोजना रद्द होने का मामला आज भी स्थानीय जनता के लिए भावनात्मक मुद्दा है, जिसे छेड़ने से चुनावी माहौल में भाजपा को बढ़त मिल सकती थी। लेकिन भाषण में इस मुद्दे को बिल्कुल भी स्थान न मिलने से पार्टी में हलचल देखी जा रही है।

क्या रणनीति में आया बदलाव?

राजनीतिक विश्लेषक इसे भाजपा की रणनीति में संभव बदलाव के रूप में देख रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, पार्टी संभवतः अपने फोकस को उद्योग बनाम कृषि के विवाद से हटाकर नए चुनावी मुद्दों पर केंद्रित करना चाहती है। हाल के महीनों में पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे ज्यादा प्रमुख रहे हैं। ऐसे में भाजपा शायद इन विषयों को तूल देने की कोशिश कर रही हो।

कुछ राजनीतिक टिप्पणीकार यह भी मानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी का भाषण ‘सकारात्मक विकास एजेंडा’ को आगे बढ़ाने पर केंद्रित था, इसलिए उन्होंने विवादित मुद्दों को छूने से बचा। हालांकि, भाजपा के स्थानीय नेताओं की उम्मीदें अलग थीं।

बंगाल भाजपा नेताओं की अंदरूनी प्रतिक्रिया

पार्टी के भीतर से यह जानकारी आई है कि कई नेताओं ने आपस में चर्चा में नाराजगी जताई। उनका मानना है कि सिंगूर जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मंच पर उद्योग और रोजगार जैसे मुद्दों को उठाया जाना चाहिए था।

एक वरिष्ठ नेता ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा कि “सिंगूर सिर्फ भूमि आंदोलन का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह बंगाल में उद्योग और निवेश की असफलताओं की याद भी दिलाता है। यह मुद्दा जनता से सीधा जुड़ता है।”

तृणमूल कांग्रेस की प्रतिक्रिया

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने पीएम मोदी की इस ‘चुप्पी’ को भाजपा की चुनावी कमजोरी करार दिया। टीएमसी नेताओं का कहना है कि भाजपा अब सिंगूर मुद्दे पर जनता को प्रभावित करने में असमर्थ है, इसलिए प्रधानमंत्री ने इसे जानबूझकर टाल दिया।

टीएमसी प्रवक्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार अब नए निवेश और उद्योग को आकर्षित करने पर काम कर रही है, इसलिए पुराने विवादों को उठाना भाजपा के लिए फायदेमंद नहीं रहा।

आने वाले दिनों में राजनीति गरमाएगी

विशेषज्ञों का मानना है कि सिंगूर का मुद्दा फिलहाल शांत भले हो गया हो, लेकिन चुनाव नजदीक आने पर यह फिर सुर्खियों में लौट सकता है। भाजपा इस मुद्दे को फिर से उठा सकती है, या पूरी तरह नई रणनीति के साथ आगे बढ़ सकती है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पीएम मोदी के भाषण के बाद बंगाल भाजपा अपनी चुनावी लाइन दोबारा तैयार कर सकती है। उद्योग, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर आगे की रणनीति आने वाले दिनों में साफ होगी।

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