भारत-EU व्यापार समझौता 2026: ‘Mother of All Trade Deals’ की पूरी जानकारी और प्रभाव
भूमिका: वैश्विक व्यापार का नया अध्याय
27 जनवरी 2026 को भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने जिस ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं, उसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया और अर्थशास्त्रियों द्वारा ‘Mother of All Trade Deals’ का नाम दिया गया है। यह समझौता न केवल दो आर्थिक शक्तियों के बीच के गतिरोध को समाप्त करता है, बल्कि आने वाले दशकों के लिए वैश्विक व्यापार (Global Trade) की नई रूपरेखा भी तय करता है।
9 सालों की लंबी बातचीत और दर्जनों दौर की वार्ताओं के बाद, यह डील भारत की अर्थव्यवस्था को 10 ट्रिलियन डॉलर की ओर ले जाने की दिशा में एक बड़ा उत्प्रेरक (Catalyst) मानी जा रही है।
1. इस समझौते को ‘Mother of All Deals’ क्यों कहा जा रहा है?
इस समझौते का पैमाना इतना बड़ा है कि इसे किसी भी सामान्य व्यापारिक संधि से ऊपर रखा जा रहा है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
विशाल बाजार की पहुंच: यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र (भारत) और दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक ब्लॉक (EU) को जोड़ता है। इसमें लगभग 2 अरब उपभोक्ताओं का बाजार शामिल है।
जीडीपी में हिस्सेदारी: भारत और 27 यूरोपीय देशों की सामूहिक जीडीपी वैश्विक अर्थव्यवस्था का लगभग 25% से 30% हिस्सा बनाती है।
व्यापक कवरेज: इसमें केवल वस्तुओं (Goods) का व्यापार ही नहीं, बल्कि सेवा (Services), निवेश (Investment), डिजिटल व्यापार, और बौद्धिक संपदा (IPR) जैसे 23 से अधिक अध्याय शामिल हैं।
2. भारत के लिए इसके क्या मायने हैं? (Key Benefits for India)
निर्यात में भारी उछाल (Export Growth)
भारतीय निर्यातकों के लिए अब यूरोप का बाजार पूरी तरह खुल गया है। विशेष रूप से कपड़ा (Textiles), हस्तशिल्प, और चमड़ा उद्योगों को 0% ड्यूटी का लाभ मिलेगा, जिससे वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारतीय सामान सस्ता और सुलभ होगा।
आईटी और पेशेवर सेवाओं का विस्तार
भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और इंजीनियरों के लिए अब यूरोपीय देशों (जैसे जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड) में काम करना आसान होगा। ‘मोबिलिटी एग्रीमेंट’ के तहत वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है, जिससे भारत की Service Export क्षमता में अरबों डॉलर का इजाफा होगा।
मैन्युफैक्चरिंग हब (Make in India)
यूरोपीय कंपनियां अब चीन के विकल्प के रूप में भारत को अपना ‘प्रोडक्शन बेस’ बनाएंगी। इससे भारत में FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) का प्रवाह बढ़ेगा और लाखों नए रोजगार पैदा होंगे।
3. यूरोपीय संघ को क्या मिला?
यूरोपीय देशों के लिए भारत एक “सोने की खान” जैसा बाजार है। इस डील के जरिए:
ऑटो सेक्टर: यूरोपीय लग्जरी कारों (Audi, Mercedes, BMW) पर लगने वाले भारी आयात शुल्क को कम किया गया है।
कृषि उत्पाद: यूरोपीय वाइन, चीज (Cheese), और जैतून के तेल (Olive Oil) को भारतीय बाजारों में अधिक जगह मिलेगी।
मशीनरी और तकनीक: यूरोप अपनी उच्च तकनीक वाली मशीनरी और ग्रीन टेक्नोलॉजी भारत को निर्यात कर सकेगा।
4. प्रमुख आर्थिक प्रावधान और आंकड़े (Table)
| क्षेत्र | समझौते से पहले | समझौते के बाद (अनुमानित) |
| द्विपक्षीय व्यापार | ~$120 बिलियन | $250+ बिलियन (अगले 5 साल में) |
| कार आयात शुल्क | 60% – 110% | 10% – 15% (चरणबद्ध तरीके से) |
| टेक्सटाइल ड्यूटी | 9% – 12% | 0% |
| रोजगार सृजन | – | 50 लाख+ नए अवसर |
5. क्या चुनौतियां हैं?
इतने बड़े समझौते में कुछ संवेदनशील मुद्दे भी रहे हैं, जिन पर दोनों पक्षों ने ‘मिडल ग्राउंड’ तलाशा है:
डेयरी सेक्टर: भारत ने अपने करोड़ों किसानों के हितों की रक्षा के लिए डेयरी क्षेत्र को काफी हद तक सुरक्षित रखा है।
पर्यावरण मानक: यूरोपीय संघ के सख्त कार्बन बॉर्डर टैक्स (CBAM) पर भारत ने रियायतें प्राप्त की हैं ताकि भारतीय उद्योगों पर अचानक बोझ न पड़े।
डेटा सुरक्षा: डिजिटल व्यापार के लिए डेटा सुरक्षा कानूनों पर आपसी सहमति बनी है जो भारत के नए ‘Digital Personal Data Protection Act’ के अनुरूप है।
6. निष्कर्ष: भविष्य की राह
‘Mother of All Trade Deals’ भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनने की महत्वाकांक्षा को नई उड़ान देगा। यह समझौता चीन पर वैश्विक निर्भरता को कम करने और एक सुरक्षित, पारदर्शी सप्लाई चेन बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2030 तक भारत की जीडीपी ग्रोथ में इस अकेले समझौते का योगदान 1.5% से 2% तक हो सकता है।


